हमारे देश में मोहब्बत से बड़ा कोई ट्रेंडिंग टाॅपिक नहीं है। हर छत पर मोहब्बत खड़ी है और सड़क से कोई इश्क उसे निहार रहा है। बस इंतजार उसके मुकम्मल होने का है। मोहब्बत का मुकम्मल हो जाना यहां कोई खेल नहीं है। लाखों पापड़ बेलिए और मोहब्बत की आस, आस ही रह जाए किसे पता? ऐसा ही कुछ हाल मौसम विभाग का भी लगता है। छत पर खड़े होकर बादलों का इंतजार करते रहिए या फिर मानसून आया कि नहीं पता करने के लिए अखबारों के पन्ने पलटते रहिए या न्यूज चैनल्स के लिए रिमोट को दबाते रहिए। फिर भी मौसम का मिजाज कब बदलेगा, कब मानसून आएगा, एेसे सवालों का जवाब मिलना मुश्किल है।
इस मामले में मोहब्बत और मौसम विभाग की राशि एक है, सिंह राशि। बात जब सिंह की हो तो कौन क्या कह दे? मोहब्बत हो जाए तो कौन है जो मोहब्बत करने वालों को रोक लें। मौसम विभाग वो जो मानसून की कभी भी भविष्यवाणी कर दें। हालिया दिनों में मौसम विभाग ने जयपुर के मानसून को लेकर तीन भविष्यवाणियां की है। तीनों की तीनों भविष्यवाणियां झूठी निकली। अब लोगों को इंतजार चौथी भविष्यवाणी का है। हालांकि लोगों के लिए ये चौथी भविष्यवाणी पत्थर की लकीन हो ऐसा नहीं है। कुछ लोगाें के लिए मौसम की भविष्यवाणी का अर्थ वही नहीं होता जो मौसम विभाग कहता है। उनके लिए मौसम की भविष्यवाणी का अर्थ उसके बिल्कुल विपरीत होता है। जैसे जयपुर में आज भारी बारिश की चेतावनी का अर्थ कुछ लोगों के लिए तेज गर्मी से होने वाली परेशानी है।
अब थोड़ी सी बात मोहब्बत की। मौसम और मौसम विभाग की ही तरह मोहब्बत पर भरोसा करना भी ठीक नहीं है। ब्रेकअप, पैचअप के इस दौर में मोहब्बत का असली मजा फीका सा लगता है। एक शाम प्यार परवान चढ़े, दूसरी शाम डेट घटे और तीसरी शाम होते-होते अमेरिकन सिस्टम टीटीएमएम पर चलें यानी तू तेरे और मैं मेरे। इसलिए मोहब्बत की सोहबत में आजकन न हीर आती है और न ही रांझा दीवाना हुआ फिरता दिखाई देता है। मोहब्बत में जब तक आदमी की इज्जत का जनाजा न निकले तब तक क्या मोहब्बत की।
खैर मोहब्बत तो यूं भी एक बगावत है जिसे रोकना न तो मोहब्बत करने वाले के बस की बात है और न ही इसका विरोध करने वालों के बस में। हां, ये मसला मौसम विभाग के साथ भी कुछ ऐसा ही है। बादलों की कहानी धरतीवासियों को बताने का जरिया मौसम विभाग अगर कुछ गलत कह दे तो उसे ऊपरी चक्कर समझकर भूल जाइए। ऊपरी चक्कर न आपको समझ आएगा और न ही ये चक्कर मौसम विभाग के पल्ले पड रहा है। मानसून के बारे में मौसम विभाग की गलतियों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है। अब जब आपके पास पल्ला झाड़ने के लिए कुछ हो तो फिर शिकायत की भी गुजाइश कहां है। ये हाल मौसम विभाग का है। बस इसीलिए मौसम विभाग की भविष्यवाणियों पर ज्यादा गौर न करें और सबकुछ ऊपर वाले पर छोड़ दें। मोहब्बत में सारे जहां से पिटे आशिक की तरह।
- अभिषेक
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