हम अक्सर ये सुनते हुए बड़े हुए हैं कि फिल्में समाज का आईना है। हालांकि मैं पूरी तरह से इस बात से इत्तेफाक नहीं रखता। एक फिल्मकार अपनी फिल्म में क्या दिखाना चाहता है। ये उस पर निर्भर करता है। फिर वो फिल्म में समाज से जुड़ी समस्या दिखाए, अंतरिक्ष की कहानी दिखाए या कुछ असाधारण या फिर कोर्इ बकवास। हां, मैं ये जरूर मानता हूं कि कभी-कभी कोई फिल्मकार हमारे अंतर्मन को फिल्म की शक्ल में जरूर सामने रखता है। ये भी एक अपवाद की तरह ही होता है लेकिन जब होता है तो उस चीज को भुला देना असंभव होता है।
आजकल एक फिल्म के कुछ दृश्यों को भुला नहीं पा रहा हूं, मैं जितना उन दृश्यों को देखता हूं स्वयं को एक अलग ही दुनिया में पाता हूं। बहुत संभव है कि ये हाॅलीवुड फिल्म किसी क्लासिक फिल्म की श्रेणी में न सम्मिलित हो लेकिन ये मेरे दिल के जरूर करीब है। ये फिल्म है ‘द लास्ट समुराई‘। फिल्म के कुछ दृश्य ऐसे हैं जिन्हें भूलना असंभव है। खासतौर पर जब आप जीवन और मृत्यु की बहस को किसी चर्चा में और लंबा खींचते रहे हैं। फिल्म के आखिरी कुछ दृश्य जो कर देते हैं वो दूसरी कुछ फिल्मों के बस की बात नहीं है।
फिल्म में दो मुख्य किरदार हैं। एक है कात्सोमोटो, जिसे बखूबी निभाया है केन वाटनबे ने और दूसरा किरदार नाथन एलग्रिन का है जिसे अभिनेता टाॅम क्रूज ने नर्इ ऊंचाइयां दी है। फिल्म के एक संवाद में टाॅम क्रूज से पूछा जाता है कि ये बताइए कि वो कैसे मरे थे? टाॅम क्रूज का जवाब होता है ‘ये सुनिए वो जिए कैसे थे?‘ हमेशा मरने वाले की मौत का कारण जानने में हमारी दिलचस्पी होती है, लेकिन मरने वाले ने अपनी जिंदगी कैसे जी? ये पूछना हम हमेशा भूल जाते हैं। शुरूआती दौर में जब मेरे पिता मुझे खबर लिखना सिखाते थे तो एक दिन मैंने एक बार ‘मृत्यु‘ को ‘मृत्यू‘ लिख दिया था। उस वक्त उन्होंने मुझे टोकते हुए कहा था कि मृत्यु बहुत छोटी बात है हर किसी को आनी है मात्रा छोटी आएगी। ‘द लास्ट समुराई‘ भी हमें यही सिखाती है। मृत्यु तो जिंदगी का एक हिस्सा है और हम हमेशा मृत्यु की बात करते हैं, जिंदगी को भूल जाते हैं।
फिल्म के एक दृश्य में समुराई अपनी तलवारों और दूसरे परंपरागत हथियारों से लैस होकर बंदूकधारी सैनिकों से टकरा जाते हैं। दिमाग वालों के लिए ये मूर्खता है और दिलवालों के लिए अपने आदर्शों के लिए बलिदान हो जाना। लड़ने वाले हर समुराई को पता होता है कि उन्हें मरना है, लेकिन जब आप सही हों तो अपनी बात के लिए लड़ना और मर जाना भी सम्मान है। एक-एक कर ढेर होते समुराई और उन पर गोली चलाते बंदूकधारी सैनिकों को देखकर ऐसा लगता है मानो गोलियां आपका हदय भेदकर निकल रही हों।
आखिर में जब सारे समुराई वीरगति को प्राप्त होते हैं या फिर घायल अवस्था में वीरगति का इंतजार करते हैं उस वक्त गोली चलाने वाले एक सैनिक का दिल पसीजता है और वो उन महान योद्धाओं को सम्मान देने के लिए घुटनों पर बैठकर अपने दुश्मनों के सामने नतमस्तक हो जाता है। धीरे-धीरे हर सैनिक को ये अहसास होता है कि जिन्हें वे ढेर कर चुके हैं असली योद्धा तो वे थे। हर सैनिक घुटने पर आता है और उन महान योद्धाओं के सम्मान में नतमस्तक हो जाता है। एक योद्धा के लिए उस मौत से बढ़कर और क्या हो सकता है जब दुश्मन उसे झुककर सम्मान दे। आदर्शों के लिए बलिदान हो जाने वालों के लिए हर किसी के मन में सम्मान होता है। कात्सोमोटो, नाथन से कहता है कि तुमने अपनी खोर्इ इज्जत पा ली है आैर मुझे इज्जत से मरना है। कात्सोमोटो को इज्जत की वो मौत नसीब होती है जिसका ख्वाब उसने हमेशा देखा था।
आखिर में जापान के राजा को अपनी गलती का अहसास होता है। परंपराआें आैर नवीनता के द्वंद्व के बीच उन्हें लगता है कि उन्हाेंने संगठित जापान का जो सपना देखा था वो अपनों की कीमत पर नहीं हो सकता। राजा कहते हैं कि हमारे पास चाहे कुछ भी हो लेकिन हमें ये भूलना नहीं चाहिए कि हम कौन हैं? हमें भी हमेशा ये याद रखना चाहिए।
- अभिषेक

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