कदम जब जमने लगे
दूसरे जब आवाज समझने लगे
वो गिनती सुनाने लगे
मुस्कुराहट,
गुस्सा,
प्यार,
जिद,
हर रोज उस पर उतरने लगे
उस रोज खबरदार हो जाना
तुम उस रोज घर को सजाना
ध्यान रखना और
वो आलमारी हटा देना।
बच्चों के लिए खतरनाक है वो आलमारी
जहां रखी है किताबें ढेर सारी
पृष्ठों को एक दूसरे से उलझने दो
अंदर ही अंदर
एक अध्याय को खत्म
दूसरे को शुरू होने दो
तर्क को ताले में कैद करो
दिमाग को खर्च मत होने दो
क्योंकि अच्छी बातें
किसी और के लिए रहने दो।
जाआे उन्हें अय्यारी सिखाओ
मक्कारी सिखाओ
और पोटलियां बनाओ
ज्ञान की,
तर्क की,
हास्य की,
खुशी की,
और बहुत दूर ले जाओ
क्योंकि
इस जहां के लिए जरूरी है जो
अपने बच्चों को वही सिखाओ
जाओ पहले वो किताबों की आलमारी हटाओ।
- अभिषेक
दूसरे जब आवाज समझने लगे
वो गिनती सुनाने लगे
मुस्कुराहट,
गुस्सा,
प्यार,
जिद,
हर रोज उस पर उतरने लगे
उस रोज खबरदार हो जाना
तुम उस रोज घर को सजाना
ध्यान रखना और
वो आलमारी हटा देना।
बच्चों के लिए खतरनाक है वो आलमारी
जहां रखी है किताबें ढेर सारी
पृष्ठों को एक दूसरे से उलझने दो
अंदर ही अंदर
एक अध्याय को खत्म
दूसरे को शुरू होने दो
तर्क को ताले में कैद करो
दिमाग को खर्च मत होने दो
क्योंकि अच्छी बातें
किसी और के लिए रहने दो।
जाआे उन्हें अय्यारी सिखाओ
मक्कारी सिखाओ
और पोटलियां बनाओ
ज्ञान की,
तर्क की,
हास्य की,
खुशी की,
और बहुत दूर ले जाओ
क्योंकि
इस जहां के लिए जरूरी है जो
अपने बच्चों को वही सिखाओ
जाओ पहले वो किताबों की आलमारी हटाओ।
- अभिषेक
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