डियर राजनीति,
हम सब यहां पर प्रसन्न हैं और भगवान से तुम्हारी प्रसन्नता की कामना करते हैं। ये कामना इसलिए कि तुम्हें हमेशा अप्रसन्न ही देखते हैं। परमपिता की असीम अनुकम्पा से ये पत्र तुम्हें लिखने का जो मुझे मौका मिला है, उसे मैं अपना अहोभाग्य समझता हूं। ईश्वर से कामना है कि एक बार के लिए ये बहुत ज्यादा है, अब ऐसा कोई पत्र लिखने का मुझे मौका न दें।
तो सुनो डियर राजनीति, तुम इतनी कितनी भोली हो समझ ही नहीं आता? मैं तुम्हें डियर राजनीति तो कह सकता हूं ना। तुम बहुत जल्दी बुरा मान जाती हो, लेकिन मुझे अपना हितैषी समझो और कुछ समझ लो। डियर का एक मतलब हिरण भी निकाला जा सकता है ना, लेकिन हिरण तुम्हें कोई कैसे कह सकता है। मैं माफी मांगता हूं। तुम तो ऐसी हो नहीं सकती हो ना। कैसे हिरण का काम कूदना, उछलना और फिर कभी कभी शिकार बन जाना होता है? इतने सालों से मैं तुम्हें जानता हूं। उछलना कूदना तुम्हें शोभा नहीं देता। ‘डियर राजनीति‘ ये आपकी शालीन छवि पर एक भददा सा दाग जैसा नजर आता है। उछलकूद करते हुए विवादों को जन्म देना तुम्हारा काम नहीं है। बस तुम्हारा काम है विवाद होते देखना। आखिर कैसे तुम डियर हो सकती हो। ना-ना 'डियर राजनीति' नहीं जमता।
‘हां, शिकार करने में आप अच्छी हैं इसके लिए साधुवाद।‘ मैं तो आपको ये भी नहीं कह सकता। सारे इल्जाम आपके पास आते भी हैं तो बच कर निकल जाते हैं तो मैं आपको ये भी नहीं कह सकता हूं और न ही इसके लिए आपको साधुवाद दे सकता हूं।
अब दूसरे अर्थ पर नजरें इनायत करूं तो यहां पर भी आपको निराशा ही हाथ लगेेगी। आपको कोई प्रिय कह दे, कैसे कह दे? आपकी हर बात विवादों से जन्म लेती हैं। आपकी हर बात पर लोगों को कोफ़्त होती है। तो डियर राजनीति जी आप किसी के लिए प्रिय कैसे हो सकती हैं। यूं तो डियर माॅम, डियर फादर जैसे कई संबोधन हैं। पर राजनीति के लिए डियर कौन कहता है।
शुरू में सोचा था कि डियर पर आपको कुछ ऐसा लिखूं कि आपको भी लगे कि डियर ठीक है, इसमें कुुछ गलत नहीं है। पर अब लगता है कि ये डियर दूसरों के लिए ही रहने दें। आप बिना डियर के ही अच्छी हैं।
इस डियर पत्र का जवाब जरूर दीजिएगा।
आपका
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(नोटः- इस पोस्ट को किसी भी राजनेता से जोड़कर देखना आपकी भूल है, लेकिन भूल किसी से भी हो सकती है।)
- अभिषेक
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