रविवार, 26 जून 2016

सूखे पत्ते क्यों जलाते हैं लोग

सूखे पत्ते क्यों जलाते हैं लोग
अपनी बात से मुकर जाते हैं लोग

हिम्मत के मायने यहां बहुत छोटे हैं
क्यों पीठ पीछे बात बनाते हैं लोग

इन किताबों को सिरहाने रख सो जाइए
आजकल चापलूसी में बीए कराते हैं लोग

खुली फिजां में घुटता है दम उनका
बंद कमरों में जिंदगी जिए जाते हैं लोग

चरागों से रोशन होती है दुनिया
और अंधेरे के लिए चराग बुझाते हैं लोग

यहां दुश्मनों के लिए बन गई हैं दीवारें
दोस्ती भी ऐसी कि मंदिर-मस्जिद गिराते हैं लोग


- अभिषेक

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